समग्र नैतिक क्रान्ति द्रष्टा-सत्योपदेशक श्रीराम
समग्र नैतिक क्रान्ति द्रष्टा-सत्योपदेशक श्रीराम प्रभु श्रीराम का वनवासकालीन चित्रण गोस्वामी तुलसीदास द्वारा- मंगलरूप भयउ बन तब ते। कीन्ह निवास रमापति जब ते।। फटिक सिला अति सुभ्र सुहाई। सुख आसीन तहां द्वौ भाई।। कहत अनुज सन कथा अनेका। भगति बिरति नृपनीति बिबेका।। सत्योपदेशक श्रीराम ने वनवास में अनुज लक्ष्मण को भक्ति, वैराग्य, राजनीति और ज्ञान की अनेक कथाएं कहकर उपदेश प्रदान किया तथा वनवास उपरांत अयोध्या में भी सभी अनुजों को सत्य उपदेश प्रदान किया। राम करहिं भ्रातन्ह पर प्रीती। नाना भांति सिखावहिं नीती।। सत्य उपदेश श्रवण से ही महान जीवन मूल्यों को अंगीकार करने की प्रेरणा मिलती है। जैसे मानव देह में नेत्र देखने का कार्य करते हैं, उसी प्रकार सत्य उपदेश विवेक रूपी नेत्र प्रदान करता है। जिसके आधार पर सत्य-असत्य का बोध होता है। सत्य प्रकाश, आनंद एवं शांति प्रदान करता है जबकि असत्य अंधकार, खिन्नता एवं अशांतिदायक होता है। सत्य उपदेश श्रवण पुण्य श्रेणी में आता है जबकि असत्य उपदेश श्रवण पाप श्रेणी में आ...
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